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मिनीसटेडियम सुनसुनिया में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा द्वारा मकर संक्रांति उत्सव का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया, जिसमें महासमुंद जिला पर्यावरण प्रमुख श्री नंदूराम निर्मलकर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत भगवा ध्वज वंदन, संघ प्रार्थना और सामूहिक गीत के साथ हुई, तत्पश्चात स्वयंसेवकों ने व्यायामयोग, गणक्रम और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से समाज‑जीवन में अनुशासन और संगठन के महत्व को प्रदर्शित किया।
अपने सारगर्भित उद्बोधन में श्री निर्मलकर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा मनाए जाने वाले छह प्रमुख उत्सवों दृ वर्ष प्रतिपदा, हिन्दू साम्राज्य दिवस, गुरु पूर्णिमा, रक्षाबंधन, विजयादशमी और मकर संक्रांति दृ पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये उत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हिन्दू समाज के संगठन, आत्मसम्मान, कृतज्ञता, बंधुत्व और राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करने के सांस्कृतिक अवसर हैं, जो वर्षभर संघ जीवन को दिशा और गति देते हैं।
मकर संक्रांति के प्रसंग से वर्तमान परिदृश्य की चर्चा करते हुए निर्मलकर ने कहा कि आज वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर सनातन हिन्दू समाज पर वैचारिक, सांस्कृतिक और जनसंख्या‑संतुलन सहित अनेक प्रकार के आघात हो रहे हैं। उन्होंने धर्मांतरण, सांस्कृतिक प्रदूषण, परिवार व्यवस्था पर हमले, सामाजिक वैमनस्य और नशे‑फैलाव जैसी समस्याओं को चिन्हित करते हुए चेताया कि यदि समय रहते समाज जाग्रत और संगठित न हुआ, तो इनका दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक जाएगा।
निर्मलकर ने सभी सनातनियों से आह्वान किया कि वे व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर, जाति‑प्रांतीय संकुचन से ऊपर उठकर “हिन्दवः सोदराः सर्वे, न हिन्दू पतितो भवेत्” की भावना के साथ एकजुट हों। उन्होंने संघ की शाखा, सेवा‑कार्यों, परिवार प्रबोधन, संस्कार‑वर्गों और पर्यावरण संरक्षण अभियानों को हिन्दू समाज की एकता व सुरक्षा के प्रभावी माध्यम बताते हुए गांव‑गांव, बस्ती‑बस्ती में संगठन शक्ति बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में उत्सव परिसर में उपस्थित स्वयंसेवकों, मातृशक्ति, बाल स्वयंसेवकों और आम नागरिकों ने तिल‑गुड़, प्रसाद के माध्यम से समरस किया और “अखंड हिन्दू समाज, संगठित हिन्दू शक्ति” के संकल्प को दोहराया। मकर संक्रांति से प्रारंभ नववर्ष में छह उत्सवों की भावना के अनुरूप और अधिक सेवा, संगठन व संस्कार‑निर्माण के कार्य करने का संकल्प लिया
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स्वामी विवेकानंद जयंती पर भव्य शोभायात्रा
पत्थलगांव
सरस्वती शिशु मंदिर उच्च. माध्य. विद्यालय पत्थलगांव के द्वारा नगर के तीनों मार्गों से होकर उनके आदर्शों ,शिकागो भाषण और राष्ट्रीय युवा दिवस के महत्व को जन जन तक पहुंचाने हेतु भव्य शोभायात्रा निकाली गई।विद्यालय के भैया बहनों ने स्वामी विवेकानंद,भारत माता,रानी लक्ष्मीबाई जैसे महापुरुषों के स्वरूप धारण किए थे," उठो , जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत " ज्ञान, शक्ति ,सेवा जैसे गगनभेदी नारे से शहर गुंजायमान हो गया। शोभायात्रा को देखकर नगर के लोग जगह जगह पुष्प वर्षा किए ,एवं जय विवेकानंद के नारे भी लगाए।यह शोभायात्रा केवल एक जुलूस नहीं,बल्कि युवाओं को विवेकानंद के पथ पर चलने और देश के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करने का एक सफल प्रयास थी।शोभायात्रा के दौरान स्वामी जी के एकाग्रता,आत्मविश्वास,चरित्र निर्माण ,और सर्वजन हिताय के विचारों का उल्लेख किया गया।
स्वामी विवेकानंद जी की ओजस्वी वाणी और विचारों ने भारत की समृद्ध सनातन संस्कृति को विश्वपटल पर गौरव के साथ स्थापित किया ,उनकी प्रेरणा विश्व भर के लोगों के युवाओं को सदैव जागृत करती रहती है।
उनके कई अनमोल विचार है
उठो जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत ,शक्ति जीवन है,निर्बलता मृत्यु,
एक समय में एक काम करो और पूरी आत्मा से करो,खुद पर विश्वास करो,तुम जो सोचते हो,वहीं बनते हो,कभी मत सोचो कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है,हर अच्छी बात का पहले मजाक उड़ता है,संगति अच्छे लोगों से करो,सत्य को हजार तरीके से बताया जा सकता है ,पर हर एक सत्य ही होगा।
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sarswati shishu mandir ashoknagar sarkanda bilaspur mahan ganitagy shree nivas ramanujan jaynati samaroh
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